यूनान था कभी खो गया मिस्र था कभी खो गया बेबी लोन था कभी खो गया कितनी सभ्यताएं आई और चली गई लेकिन भारत जिस की परंपरा इतनी पुरानी होने के बावजूद भी आज भी अपना अस्तित्व बनाए हुए हैं। 

mark twain लिखते हैं। 


"भारत मानव जाति का पालना है यह वह स्थान है जहां मानव भाषा का जन्म हुआ भारत की धरती मानव इतिहास की मां है यह महान गाथाओं की दादी है और परंपराओं की परदादी है भारत मानव इतिहास की सबसे कीमती और सब से रचनात्मक चीजों का खजाना रहा है" 


लेख में हम आपको भारतीय प्राचीन इतिहास की 7 इंटरेस्टिंग बातें जानेंगे। 


1. archeology सर्वे के सबूत बताते हैं कि भारत का शहर वाराणसी दुनिया के सबसे गए प्राचीन शहरों में से एक है जो आज भी अपने वजूद में है इसे बनारस भी कहा जाता है ऋग्वेद में इसे काशी कहा गया है वैसे बनारस को लगभग 3000 माना जाता है लेकिन हिंदू मान्यताओं के अनुसार भगवान शिव ने इसे 5000 साल पहले इसकी स्थापना की थी और आपको यह जानकर हैरानी होगी कि जब हर ढाई हजार साल  पहले भगवान बुध काशी आए थे उस समय भी इसे प्राचीन शहर कहा जाता था हिंदू धर्म के साथ पवित्र स्थानों में से काशी को सबसे पवित्र माना जाता है यहां तक कि जैन और बौद्ध धर्म में भी काशी का एक अलग स्थान है। 


2. तक्षशिला विश्वविद्यालय को दुनिया की सबसे पहली विश्वविद्यालय माना जाता है इसको ईसा से 700 साल पहले स्थापित किया गया था आजकल यह जगह पाकिस्तान में मौजूद है तक्षशिला में विश्व भर के लगभग 10,000 छात्र पढ़ा करते थे विज्ञान, गणित ,ध्यान ,राजनीति ,खगोल विज्ञान, खगोलीय ,संगीत ,धर्म और मनोविज्ञान जैसे 8 से भी ज्यादा विषय यहां पढ़ाई जाते थे अलग-अलग विषयों के स्कॉलर यहां अपने आश्रम बना रखे थे हमारे मशहूर इकोनॉमिस्ट और फिलॉस्फर विष्णु गुप्त चाणक्य तक्षशिला में ही आचार्य थे चीनी यात्री फाह्यान जब भारत आए थे तब उन्होंने तक्षशिला को भी देखा था अपनी पुस्तकों में उन्होंने तक्षशिला का भी विवरण प्रस्तुत किया है सातवीं सदी ईसा पूर्व से लेकर पांचवी सदी तक भारत का यह महान विश्वविद्यालय अच्छी तरह फला फूला छठी सदी आती है विदेशी हमलावरों ने तक्षशिला को लगभग पूरी तरह से नष्ट कर दिया। 

3. शिक्षा के मामले में भारत आज भी बहुत से देशों से पीछे हो लेकिन एक समय था जब नालंदा यूनिवर्सिटी उच्च शिक्षा के लिए दुनिया की सर्वश्रेष्ठ यूनिवर्सिटी हुआ करती थी नालंदा तक्षशिला से भी और अधिक व्यवस्थित और प्रबंधित था कोरिया ,जापान ,चीन तिब्बत ,इंडोनेशिया फारस और तुर्की जैसे देशों से छात्र यहां शिक्षा ग्रहण करने आते थे नालंदा विश्वविद्यालय का प्रारंभिक परीक्षा अत्याधिक कठिन हुआ करता था चुनिंदा प्रतिभाशाली छात्र ही इसमें प्रवेश पा सकते थे नालंदा के बारे में जो आज हमें ज्यादा जानकारी मिलती है वर्ल्ड फेमस चाइनीस यात्री व्हेन सांग और इत्सिंग की राइटिंग से प्राप्त होती है जो सातवीं शताब्दी मैं यहां आए थे व्हेन सामने अपनी यात्रा के 2 साल नालंदा विश्वविद्यालय में बिताए थे प्रारंभिक समय में वह छात्र की तरह यहां रहे फिर बाद में उन्होंने यहां पढ़ाया भी व्हेन सांग लिखते हैं कि जब जब वह नालंदा आए थे तब यहाँ  10000 छात्र थे और १५०० शिक्षक सदस्य यह अनुमान लगाया जाता है कि एक समय में हमारे मैथमेटिक्स आर्यभट्ट नालंदा के प्रमुख थे नालंदा विश्वविद्यालय में छात्रों की पढ़ाई के लिए एक विशाल लाइब्रेरी हुआ करती थी इस लाइब्रेरी में 300000 से भी ज्यादा किताबें थी 12 वीं शताब्दी के अंत में तुर्की हमलावर बख्तियार खिलजी नालंदा को जलाकर पूरी तरह से नष्ट कर दिया किसी जमाने में नालंदा यूनिवर्सिटी हुआ करती थी आजकल बस उसके शेष बचे हुए हैं। 

4. सिंधु घाटी सभ्यता के जन्म से ही भारत का इतिहास शुरू माना जाता है यह दुनिया के 3 प्राचीन महान सभ्यताओं में से एक थी मेसोपोटामिया इंसेंट इन इजिप्ट और सिंधु घाटी सभ्यता और इसको अगर इंडस वैली और मेसोपोटामिया के साथ तुलना करें तो सिंधु घाटी सभ्यता ज्यादा व्यवस्थित सभ्यताओं में से एक थी अगर अगर इंफ्रास्ट्रक्चर और शहर की बनावट की बात करें तो इंडस वैली उस समय के लोगों के लिए एक महान सभ्यता थी सिंधु घाटी सभ्यता के बारे में यह माना जाता है कि यह सब बता 3300 ईसा पूर्व से लेकर 1320 अपूर्व तक अस्तित्व में थी लेकिन नई खोज यह बताती है कि यह सब बता 8000 पुरानी हो सकती है 1920 तक हमको इस सभ्यता के बारे में कुछ भी नहीं पता था 1920 में जब इंडिया के आरटीओ लॉजिकल डिपार्टमेंट ने इंडस वैली में खुदाई की तो वहां इस सभ्यता के दो पुराने  शहरों मोहनजोदड़ो और हड़प्पा के अवशेष मिले थे इसके बाद ही हमको सिंधु घाटी सभ्यता की बसावट के बारे में पता चला मोहनजोदड़ो और हड़प्पा ए दोनों जगह अब पाकिस्तान में है सिंधु घाटी सभ्यता के बारे में अभी तक बहुत ही कम जानकारी मिल पाई है और बहुत से प्रश्नों का जवाब मिलना अभी बाकी है। 

5. जीरो का आविष्कार भारत में हुआ था दो महान गणितज्ञ ब्रह्म गुप्त और आर्यभट्ट को जीरो के आविष्कार के लिए प्रेरित किया जाता है और आज दुनिया जिनको अरेबिक न्यूमैरिक कहती है इनका आविष्कार अरब में नहीं हुआ था बल्कि सिक्स और सेवन सेंचुरी में भारतीय गणितज्ञों ने खोज किया था अरब और भारत के लोग इसको हिंदू संख्या कहते थे अल्किन दी जो कि अरब के गणितज्ञ थे और अल ख्वारिज्मी जो भारत के गणितज्ञ थे इन दोनों के लेखन के जरिए ही भारतीय लेखन यूरोप तक पहुंचा था और बाद में इसी लिए यूरोपियन इनको अरबिक निर्मित कहने लगे थे 


आइंस्टाइन लिखते हैं 


" हम भारतीयों के बेहद रणी हैं जिन्होंने हमें गिनती करना सिखाया जिसके बिना कोई सार्थक वैज्ञानिक खोज नहीं की जा सकती थी" 


6. सर्जरी कितनी मुश्किल होती है और आप एक ऐसे जमाने में हो जहां स्केल पल की खोज ही ना की गई हो तब तो उसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती आज से 2600 पहले सुश्रुत बेहद कठिन सर्जरी किया करते थे जैसे कैटरेक्ट किडनी स्टोन आर्टिफिशियल लिंब फैक्चर और यहां तक की प्लास्टिक सर्जरी भी सुश्रुत को पहला व्यक्ति माना जाता है जिन्होंने इंसानों पर सबसे पहले प्लास्टिक सर्जरी का प्रयोग की है इसलिए इनको फादर ऑफ सर्जरी भी कहा जाता है सुश्रुत ने शल्य चिकित्सा पर एक संस्कृत ग्रंथ भी लिखा था जिसे सुश्रुत संहिता भी कहा जाता है सुश्रुत संहिता को चिकित्सा पर लिखा गया सर्वाधिक महत्वपूर्ण प्राचीन ग्रंथ माना जाता है और इसको आयुर्वेद का आधारभूत पुस्तक  माना जाता है सुश्रुत संहिता में 184 भाग है जिनमें जिक्र मिलता है 1120 बीमारियों का 700 चिकित्सकीय पौधों का और 64 खनिज तत्वों का और 57 एनिमल सोर्स का इसके अलावा बहुत से सर्च कर यंत्रों के बारे में भी जानकारी दी गई है आठवीं सुश्रुत के इस महान ग्रंथ को किताब शाह सुन अल हिंदी के नाम से भी अरबी में ट्रांसलेट किया गया था एक और महान प्राचीन चिकित्सक थे महर्षि चरक जो सुश्रुत के बाद और ईसा से 200 साल पहले के थे इनकी शिक्षा तक्षशिला में हुई थी शरद को पहला फिजिशियन माना जाता है जिन्होंने डाइजेशन मेटाबॉलिज्म और इम्यूनिटी के सिस्टम को सामने रखा महर्षि चरक की मेडिकल स्टेटस चरक संहिता को आयुर्वेद की इनसाइक्लोपीडिया माना जाता है। 


7. अगर भारत के इतिहास में झांके तो वह बेहद वैभवशाली नजर आता है ब्रिटिश रूल से पहले भारत दुनिया के सबसे अमीर देशों में शुमार हुआ करता था यूं ही नहीं यह देश विश्व भर में सोने की चिड़िया कहलाता था अगर कहा जाए तो गलत ना होगा कि इस देश की विशाल धनराशि ने ही इतने विदेशी आक्रांता ओं को आकर्षित किया हैरानी की बात है देश को खोजने की चाहत ने अमेरिका की खोज करवा दी कोलंबस जो भारत के लिए निकला था जो गलती से अमेरिका पहुंच गया और कोलंबस के महज कुछ साल बाद ही वास्कोडिगामा भारत की जमीन पर कदम रखने वाला पहला यूरोपियन बना। 


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