आजकल सोलर पैनल इतना अलग नजर क्यों आते हैं ? क्यों हम इन पैनल्स को पहाड़ों के ऊपर लगाने लगे हैं ? अपनी सड़कों को पाटने के लिए इस्तेमाल करने लगे हैं और अपने सागरों के बीचो बीच लगा रहे हैं ,और अगर हम अपने पूरे ग्रह को सौर पैनल से ढक देते हैं तो हमारे ग्रह के बढ़ते तापमान को रोक पाने की अच्छी संभावना है और शायद इसे कुछ डिग्री तक ठंडा कर पाने की भी ।
पर यह कैसे काम करेगा ? क्या हम सूरज की गर्मी को रिफ्लेक्ट कर सकते हैं ? पृथ्वी की हर चीज को ऊर्जा देने के लिए कितने सोलर पैनल्स की जरूरत होगी ? और क्यों सौर ऊर्जा से चलने वाला ग्रह बुरा साबित हो सकता है ?
अगर हम पृथ्वी को सोलर पैनल्स की मदद से चलाएं तो क्या स्थिति होगी ? हां यह एक तरीका जिससे हम अपने ग्रह को ठंडा करने की कोशिश कर सकते हैं उसे एल्बिडो इफेक्ट कहते हैं एल्बिडो का मतलब होता है वह रोशनी जो किसी से किसी वास्तु के सोखे जाने के बगैर ही रिफ्लेक्ट हो जाए जैसे कि अगर सारी पृथ्वी को बर्फ से ढक दिया जाए तो लगभग 0.84 एल्बिडो इफ़ेक्ट होगा इसका मतलब यह हुआ कि पृथ्वी खुद से टकराने वाली सूरज की रोशनी का 84 फ़ीसदी रिफ्लेक्ट कर देगी पर अगर सारी पृथ्वी को जंगलों की छतरी से ढक दिया जाता है तो यह आंकड़ा करीब 0.14 प्रतिशत होगा केवल 14 फ़ीसदी रोशनी रिफ्लेक्ट होगी यानी सूरज की ज्यादातर रोशनी शोक ली जाएगी।
तो अगर हम सोलर पैनल्स जैसे कुछ रिप्लाई टिप चीजों को लेते हैं और पृथ्वी को ऐसे भर देते हैं तो इनसे मिलने वाली रिन्यूएबल एनर्जी यानी नवीनीकरण योग्य उर्जा पृथ्वी को ठंडा करने में मदद करेगी यह काफी सारी गर्मी को भेज फिर कर हटा देता है और फिर हमारा ग्रह देखते ही देखते ठंडा हो जाएगा है ना यह पूरी तरह से सच नहीं है
हमारे सोलर पैनल से पृथ्वी को ठंडा होने की जगह चीजें गर्म में भी हो सकती हैं हालांकि सोलर पैनल्स हमें बेहद रिफ्लेक्टिव नजर आते हैं , सूरज की रोशनी को अंतरिक्ष मैं रिफ्लेक्ट करने के काम में बिल्कुल नकारे साबित होंगे , क्योंकि सोलर पैनल कितने गहरे रंग के होते हैं यह सूरज की रोशनी को सोख लेते हैं इससे पृथ्वी की सतह का तापमान बढ़ जाएगा साथ ही थरमो डायनामिक यानी ऊष्मागतिकी के नियमों के मुताबिक जब जब हमारे सोलर पैनल्स सौर ऊर्जा को बिजली इलेक्ट्रिसिटी मैं बदलेंगे तब तब हम और ज्यादा गर्मी पैदा कर रहे होंगे तो यह पूरा एल्बिडो वाला ख्याल हटा देते है ।
अगर हम पृथ्वी को सोलर पैनल के साथ ठंडा करना चाहते हैं, तो यह तभी मुमकिन है जब हम तेल गैस और कोयले जैसे जीवाश्म ईंधन ओ को पूरी तरह से हटाकर उनकी जगह सौर ऊर्जा को ले आए , अगर हम जीवाश्म ईंधन का इस्तेमाल बंद कर देते हैं तो हम उतनी ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन नहीं कर रहे होंगे , तब हम अपने गृह में गर्मी को बढ़ने से रोक पा रहे होंगे ।
तो यहां सबसे बड़ा सवाल यह उठता है की सारी पृथ्वी को सौर पैनल से ऊर्जा प्रदान करने के लिए कितनी सौर पैनल की जरूरत होगी अगर हम एक आम 350wt सोलर पैनल की बात कर रहे हैं तो ऐसे 51.4 आरव सोलर पैनल्स की जरूरत होगी सौर ऊर्जा के ऐसे प्लांट के बारे में सोचिए जो 299,467 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ हो यानी अमेरिका के एरिजोना राज्य के बराबर होगा , इतनी बड़ी योजना को तैयार करने के लिए कई लोगों को सोलर पैनल बनाने इन्हे लगाने इनकी देखरेख के काम में लगना होगा काम करने की इच्छा रखने वाले लोगों को ढूंढना मुश्किल नहीं होगा , आखिरकार जीवाश्म ईंधन के उद्योग वाले कई लोग नई नई नौकरियों की तलाश में होंगे तो हमें बस इन्हीं काम देना जारी रखना होगा और आशा रखनी है कि यह ज्यादा शिकायतें ना करें हम इस योजना से जुड़ी दूसरी कई शिकायतों के साथ जूझ रहे होंगे लोग निर्माण के वक्त पर होने वाले शोर की पैनल से निकलने वाली चमक की और रिहायशी इलाकों में पैनल्स की देखरेख वाली गाड़ियों के चलते बड़े हुए ट्रैफिक की शिकायतें करेंगे साथ ही लोग इमारतों की गिरती कीमतों से भी परेशान होंगे खास तौर से अगर उनके सामने की खूबसूरत नजारों की जगह बड़े सोलर पैनल ले
इस तरह की एक बड़ी स्तर की योजना के लिए एक और समस्या होगी जमीन का इस्तेमाल सोलर फॉर्म के लिए जमीन के इस्तेमाल का मतलब होगा रहने वालों को जगह का नुकसान और पवन ऊर्जा के फॉर्म से अलग सोलर फॉर्म्स वाली जमीनों का इस्तेमाल खेती के लिए नहीं किया जा सकता पर शायद सबसे बड़ी समस्या होगी सोलर पैनल्स को बनाना 51 अरब से भी ज्यादा सोलर पैनल स्कोर बनाने से खतरनाक उत्सर्जन होंगे इन्हीं बनाने के लिए हमें सोडियम हाइड्रोक्साइड और हाइड्रोक्लोरिक एसिड समेत कई राशियों का इस्तेमाल करना होगा पैनल्स बनाने से ग्रीन हाउस कैसे निकलेगी और कचरे की समस्या पैदा होगी।
तो अगर हम पृथ्वी को सोलर पैनल्स की मदद से ठंडा करने की कोशिश करते हैं तो शायद हम वह उत्सर्जन पढ़ा देंगे जैसे पहले हमारे ग्रह का तापमान बढ़ता आया है शायद हमें अपने ग्रह पर बढ़ती गर्मी की समस्या का एक हल ढूंढनाबंद कर देना चाहिए अगर हम पृथ्वी को एक जिंदा जीव की तरह देखने लगेंगे तो हम देखेंगे कि हमें कई तरह की कोशिशों की जरूरत है और साथ काम करने से इन जरूरतों को पूरा किया जा सकता है लेकिन इस पर चर्चा के लिए बने रहिए हमारे साथ नेक्स्ट ब्लॉक में हम आपके साथ होंगे इस पर चर्चा के साथ
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